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Showing posts from November, 2019

सेमरा गाँव की डॉ प्रियंका कुमारी राय बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

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सेमरा निवासी डॉ प्रियंका कुमारी राय का चयन हिंदी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है. ऐसी सफलता हासिल करके उन्होंने सभी ग्रामवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है. डॉ प्रियंका का चयन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के बीआरबी कॉलेज में हुआ है. उनका शोध-कार्य काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 'ग्रामीण जीवन का बदलता स्वरूप और शिवमूर्ति का कथा साहित्य' नामक विषय पर हुआ है. बड़ी बात यह है कि उनके पति डॉ अजीत कुमार राय भी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जो वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के सरदार वल्लभभाई पटेल कॉलेज में नियुक्त हैं. गौरतलब है कि डॉ अजीत को गिरमिटिया मजदूरों और भारतीय प्रवासन से संबंधित कार्यों के लिए भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और मॉरीशस के राष्ट्रपति द्वारा पोर्ट लुईस में सम्मानित भी किया जा चुका है. डॉ प्रियंका कुमारी राय डॉ अजीत कुमार राय गाँव के इतिहास में यह अभूतपूर्व है कि एक ही परिवार के और वो भी पति-पत्नी दोनों ही प्रोफेसर के पद पर हैं. डॉ प्रियंका गाँव के श्री वंश नारायण राय और श्रीमती प्रेमशीला राय की पुत्रवधू हैं. अपने पुत्र-पुत्रवधू को आ...

गंगा में गिरते-डूबते गाँव की कहानी

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समीर कुमार राय:- वो 4 जुलाई का दिन था, आसमान में सूरज सर के ठीक ऊपर था, गाँव में उस रोज़ गंगा की लहरें अपने पूरे शबाब पर थीं और लगातार चिंघाड़े जा रही थीं शायद यह चेतावनी थी कि आज आने वाले सैलाब में कई ज़िन्दगियाँ बिखर जाने वाली हैं। हमारा गाँव; नसीब का मारा हुआ गाँव, अभागा गाँव या बदनसीब लोगों का गाँव धीरे-धीरे हर साल थोड़ा-थोड़ा उजड़ रहा था। हर बरसात में गंगा नदी गाँव आती थी, गाँव के लोगों पर जमकर कहर बरपाती थी और उनकी गृहस्थी तबाह करके लौट जाती थी। गंगा की लहरों ने पहले गाँव के सामने के खेतों को निगल लिया उसके बाद भी जब उनकी भूख शांत नहीं हुई तो उसने गाँव के घरों को निगलना शुरू कर दिया। गंगा की कटान से अब तक 25-30 घर अपना वजूद खो चुके थे लेकिन हमें कतई अंदाज़ा नहीं था कि हमारा नंबर भी अब आने वाला है। उस दिन से एक साल पहले भी कटान हुई थी उस रोज़ ही ऐसा लगा कि हमारा घर अब नहीं बचेगा लेकिन पिछले साल घर के बिल्कुल सामने आकर कटान रूक गयी। एक साल तक हम लोग गंगा की गोद में पले और ये भूल गये कि अगले साल फिर तबाही होगी, फिर से कटान शुरू होगी और फिर से गाँव के घर गंगा में समाएँगे। गाँ...