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Showing posts from June, 2020

सेमरा गाँव की डॉ प्रियंका कुमारी राय बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

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सेमरा निवासी डॉ प्रियंका कुमारी राय का चयन हिंदी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है. ऐसी सफलता हासिल करके उन्होंने सभी ग्रामवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है. डॉ प्रियंका का चयन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के बीआरबी कॉलेज में हुआ है. उनका शोध-कार्य काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 'ग्रामीण जीवन का बदलता स्वरूप और शिवमूर्ति का कथा साहित्य' नामक विषय पर हुआ है. बड़ी बात यह है कि उनके पति डॉ अजीत कुमार राय भी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जो वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के सरदार वल्लभभाई पटेल कॉलेज में नियुक्त हैं. गौरतलब है कि डॉ अजीत को गिरमिटिया मजदूरों और भारतीय प्रवासन से संबंधित कार्यों के लिए भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और मॉरीशस के राष्ट्रपति द्वारा पोर्ट लुईस में सम्मानित भी किया जा चुका है. डॉ प्रियंका कुमारी राय डॉ अजीत कुमार राय गाँव के इतिहास में यह अभूतपूर्व है कि एक ही परिवार के और वो भी पति-पत्नी दोनों ही प्रोफेसर के पद पर हैं. डॉ प्रियंका गाँव के श्री वंश नारायण राय और श्रीमती प्रेमशीला राय की पुत्रवधू हैं. अपने पुत्र-पुत्रवधू को आ...

समाप्ति की ओर अग्रसर सेमरा से तरबूज की खेती

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सेमरा-शिव राय का पुरा गाँव आलू की खेती के लिए तो पूरे जनपद में विख्यात है ही लेकिन तरबूज की खेती में भी इस गाँव का महत्वपूर्ण स्थान रहा है हालांकि पिछले दो-तीन सालों से अब यहाँ की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। दरअसल यहाँ के किसान जिन खेतों में आलू की खेती करते थे, आलू की खुदाई के बाद उन सारे खेतों में तरबूज ही बोते थे। सायर जैसे गाँव के अलावा गाजीपुर में शायद ही कोई ऐसा गाँव होगा जहाँ इतने बड़े क्षेत्रफल में तरबूज की खेती की जाती हो लेकिन दुःख की बात है कि गाँव के किसान तरबूज की खेती से अब विमुख होते जा रहे हैं। गाँव के किसानों की इस खेती से भोहभंग होने के कई कारण हैं जैसे- इतना मंहगा बीज खरीद के बोने के बाद पैदावार अच्छी होने पर भी खरीददारों का न मिलना, फसल तैयार होने के बाद तुड़ाई में देर होने पर फसल का तुरंत सड़ना शुरू हो जाना और सबसे बड़ा एक कारण जंगली सूअरों का आतंक है जो खेत के खेत एक ही रात में तबाह कर डालते हैं। ऐसे ही कई कारण हैं कि अब तरबूज की कच्ची खेती करने की बजाय गाँव के किसान उड़द की खेती को अधिक महत्व देने लगे हैं। दरअसल तरबूज की तरह पकने पर यह तुरंत सड़ता भी नहीं और न ही ...