सेमरा गाँव की डॉ प्रियंका कुमारी राय बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

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सेमरा निवासी डॉ प्रियंका कुमारी राय का चयन हिंदी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है. ऐसी सफलता हासिल करके उन्होंने सभी ग्रामवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है. डॉ प्रियंका का चयन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के बीआरबी कॉलेज में हुआ है. उनका शोध-कार्य काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 'ग्रामीण जीवन का बदलता स्वरूप और शिवमूर्ति का कथा साहित्य' नामक विषय पर हुआ है. बड़ी बात यह है कि उनके पति डॉ अजीत कुमार राय भी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जो वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के सरदार वल्लभभाई पटेल कॉलेज में नियुक्त हैं. गौरतलब है कि डॉ अजीत को गिरमिटिया मजदूरों और भारतीय प्रवासन से संबंधित कार्यों के लिए भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और मॉरीशस के राष्ट्रपति द्वारा पोर्ट लुईस में सम्मानित भी किया जा चुका है. डॉ प्रियंका कुमारी राय डॉ अजीत कुमार राय गाँव के इतिहास में यह अभूतपूर्व है कि एक ही परिवार के और वो भी पति-पत्नी दोनों ही प्रोफेसर के पद पर हैं. डॉ प्रियंका गाँव के श्री वंश नारायण राय और श्रीमती प्रेमशीला राय की पुत्रवधू हैं. अपने पुत्र-पुत्रवधू को आ...

खानाबदोश जीवन जीने को मजबूर कटान पीड़ित

आज तक की रिपोर्ट:
18 मई, 2016


पहली मई की दोपहर पूर्वी उत्तर प्रदेश के आखिरी छोर पर स्थित बलिया लोकसभा क्षेत्र के हैबतपुर इलाके में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना का आगाज कर रहे थे वहीं हैबतपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर सेमरा गाँव के सरकारी स्कूलों में शरणार्थी के तौर पर रह रहे 500 परिवार अपनी अंधकार भरी जिंदगी से जंग लड़ रहे थे। इन्हीं में से एक 45 वर्षीया अंजू देवी हैं। गाजीपुर जिले से 30 किलोमीटर दूर मुहम्मदाबाद तहसील के गाँव शिव राय का पुरा की अंजू के पति की छह साल पहले मौत हो गई थी लेकिन उन पर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब जून 2013 में गंगा में आई बाढ़ और कटान में उनका घर और पाँच बीघा जमीन सब पानी में समा गये। बेसहारा अंजू नदी के दूसरे छोर पर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेमरा में पिछले तीन साल से अपने दो बच्चों के साथ शरणार्थी बनी हुई हैं। इससे कुछ दूरी पर स्थित सेमरा प्रथम का प्राइमरी स्कूल पहली नजर में पूरी तरह शरणार्थी कैंप नजर आता है स्कूल के सबसे बड़े कमरे में पाँचवीं की कक्षाएँ चलती थीं पर अब इसमें 50 वर्षीय राजेन्द्र पटेल अपने पाँच बच्चों के साथ तीन साल से रह रहे हैं। शिव राय का पुरा गाँव में दिनेश के पास पुश्तैनी 10 बीघा जमीन थी लेकिन आज उस जमीन पर गंगा की लहरों का कब्जा है। इसी स्कूल के कक्षा तीन के कमरे में थोड़ी सी बची हुई जगह में एक से पाँच तक की कक्षा के करीब 50 नौनिहाल पढ़ाई करते हैं कक्षा में 50 वर्षीया आशा देवी की बची खुची गृहस्थी भी बिखरी पड़ी है। किसान से अब मजदूर बन चुके आशा देवी के बड़े बेटे की शादी की उम्र निकलती जा रही है पर इस खानाबदोश परिवार में कोई अपनी बेटी ब्याहे तो भला कैसे।

जुलाई 2012 में राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर कटान से पीड़ित परिवारों को एक बिस्वा(126 वर्ग मीटर) जमीन देने का आदेश दिया था। सरकारी कारगुजारी देखिए कि राजस्व विभाग ने शिव राय का पुरा के 558 परिवारों को कटान पीड़ित और विस्थापित के रूप में चिन्हित किया लेकिन मुआवजे के लिए जब लेखपाल सर्वे करने आये तो इन्हें केवल 377 परिवार ही दिखे। इनके लिए सेमरा गाँव से सटे ग्राम पंचायत शेरपुर में दो करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 बीघा जमीन भी खरीद ली गई। गाँव वालों ने आवाज उठाई तो जाँच में पता चला कि 'फ्लड जोन' की इस जमीन पर भी कटान का खतरा मँडरा रहा है। मुहम्मदाबाद के उपजिलाधिकारी त्रिभुवन विश्वकर्मा बताते हैं, "बड़े अधिकारियों ने मामले की जाँच की है जल्द ही विस्थापितों को जमीन मिल जाएगी।"

ज्ञात हो कि आज तक की इस रिपोर्ट के दो साल बाद भी सरकार ने कटान पीड़ितों के लिए जमीन आवंटित नहीं की है। आज भी सेमरा व शिव राय का पुरा के कटान पीड़ित दर-दर की ठोकरें खाते हुए इस स्कूल से उस स्कूल तक भटकने को मजबूर हैं लेकिन प्रशासन इस बात से पूरी तरह बेखबर है।


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