बरसात का मौसम आ चुका है और गंगा के जलस्तर में पिछले कई दिनों से बढ़ोत्तरी हो रही है। सेमरा व शिव राय का पुरा में कटान से बचाव के लिए ठोकर निर्माण व मरम्मत का जो कार्य चल रहा था, जलस्तर बढ़ जाने के कारण उसे रोक दिया गया है। ऐसे में गाँव के लोगों को डर सता रहा है कि बीते सालों की तरह इस साल भी कहीं उन्हें गंगा की रौद्र लहरों का सामना न करना पड़े। बताते चलें कि गंगा कटान से शिव राय का पुरा का 80% व सेमरा का 50% भाग गंगा में समाहित हो चुका है। साल 2013 में सरकार ने कटान की रोकथाम के लिए ठोकर का निर्माण कराया था और उसी ठोकर का विस्तार व मरम्मत का कार्य इस साल किया जा रहा था।
गाँव में तीन जगहों पर ठोकर का काम चल रहा था। शिव राय का पुरा में रामतुलाई के पास, गाँव के मध्य में दीनानाथ राय के घर के पास व गाँव के पश्चिमी सिरे पर ठोकर का का काम चल रहा था। इनमें से सबसे खराब हाल रामतुलाई के पास वाले ठोकर का है जहाँ अब तक ठोकर की नींव ही तैयार की जा सकी है। बीते सप्ताह इसी जगह पर पत्थरों की कमी भी हो गयी थी जिसके कारण कई दिनों तक काम रूक गया था। इसी तरह से मजदूरों की मजदूरी न मिलने पर उन्होंने काम का बहिष्कार कर दिया था जिससे काम रूक गया था जबकि देखा जाय तो रामतुलाई के पास ठोकर निर्माण सबसे जरूरी था क्योंकि अगर यहाँ कटान शुरू हो जाती है तो पूरे गाँव को तुरंत अपने जद में ले लेगी लेकिन ठेकदारों की लापरवाही से यह काम पूरी तरह से अधर में लटक चुका है।

ग्रामवासियों के द्वारा डेढ़ महीने तक चले आंदोलन व दैनिक जागरण के अभियान के बाद तो गाँव में ठोकर का काम शुरू हुआ था वो भी तब जब बरसात दस्तक दे चुकी थी। विभागीय संविदा के मुताबिक 26 जून तक काम पूरा हो जाना था लेकिन इसके बावजूद भी काम की गति बहुत धीमी थी जिसके कारण तीनों जगहों में से किसी भी जगह पर काम पूरा न हो सका। गाँव के लोग शुरू से ही काम की गुणवत्ता व काम की धीमी गति पर सवाल उठा रहे थे। बीते गुरूवार को उग्र होकर उन्होंने मेठ को बंधक भी बना लिया था लेकिन ठेकेदार के द्वारा आश्वासन मिलने पर उसे मुक्त कर दिया था।
गंगा के जलस्तर में अभी भी पाँच सेमी प्रति घंटे से बढ़ाव हो रहा है ऐसे में कुछ भी अनहोनी की आशंका से ग्रामीण डरे हुए हैं व शासन प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। ज्ञात हो कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल के नेताओं ने गाँव को बचाने का वादा किया था लेकिन नयी सरकार बनने के बावजूद भी 2017 में गाँव में कुछ काम न हो सका। वहीं बहुत मशक्कत के बाद 2018 में काम तो शुरू हुआ लेकिन उसमें बहुत देर कर दी गयी। ऐसे में सरकार की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अगर सरकार गाँव को बचाना ही चाहती थी तो ठोकर का काम पहले ही शुरू करके गाँव को बचा सकती थी। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन ने बस अपना कोरम पूरा किया नहीं तो जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी की बार-बार चेतावनी के बावजूद भी ठेकदार काम में तेजी क्यों नहीं ला सके। ग्रामीणों के अनुसार अगर इस साल कुछ भी अनहोनी होती है तो ठेकेदारों व अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी ताकि सेमरा के माध्यम से हर साल पैसे कमाने का उनका धंधा बंद हो सके।
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