समाज में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो इज्जत या शोहरत कमा लेने के बाद समाज की तरफ देखना पसंद नहीं करते व अपने घमंड के आसमान से नीचे झाँकना भी पसंद नहीं करते वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोगों की भी कोई कमी नहीं है जो सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद पहले से भी अधिक विनम्र और मृदुल हो जाते हैं ठीक वैसे ही जैसे फलदार वृक्ष पर फल आने के बाद उसकी शाखाएँ नीचे की तरफ झुक जाती हैं।
अकलू राय, एक ऐसे इंसान जिनके पीछे सारा जमाना चलता था, एक ऐसे इंसान जो आजीवन समाज के कमजोर लोगों की ढाल बनकर लड़े, एक ऐसे इंसान जिनके नाम पर जाति की दीवार को गिराकर लोग एक साथ आ जाते थे, एक ऐसे इंसान जिनकी कहानियाँ आज भी लोगों की जुबान पर हैं और एक ऐसे इंसान जिनके ऊपर हमारे गाँव के लोग गर्व महसूस करते हैं।
अकलू राय का जन्म सन् 1880 के आसपास शिव राय का पुरा में हुआ था। वो असमन राय के पोते और देवकी राय के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जीवन बेहद सादगी भरा रहा। समाज में खूब नाम कमाने के बाद और लगभग 90 साल का लंबा जीवन जीने के बाद वो अपने भरे-पूरे परिवार और ढेरो चाहने वालों को छोड़कर दुनिया को अलविदा कह गये।
उनके बारे में अनेक जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं कहा जाता है कि समाज के निचले तबके व कमजोर तबके के लोग उन्हें अपना मसीहा मानते थे। इसके पीछे कारण भी था अकलू राय ऐसे लोगों की बेहतरी के लिए हमेशा तत्पर रहा करते थे। इसी विषय पर अकलू राय से संबंधित एक घटना है जो प्रमाणित कर देती है कि वास्तव में वो समाज के कमजोर लोगों के हितैषी थे।
आजादी के बाद कृषि सुधार के लिए सरकार ने कई नीतियाँ चलाई जिनमें से एक जमींदारी उन्मूलन कानून, 1950 था। उस समय ऐसे बहुत सारे खेत थे जिन खेतों पर खेत का मालिक सालों से खेती नहीं करता था बल्कि किसी और से खेती कराता था। इस कानून के तहत उन खेतों के मालिकों से उनका मालिकाना हक़ छीनकर उनको दे दिया गया जो बहुत दिनों से उस खेत पर खेती करते आ रहे थे। यह कानून पूरे भारत में लागू किया हालाँकि देश के विभिन्न राज्यों ने इस कानून को अपने-अपने हिसाब से लागू किया इसी कानून को आमतौर पर हम लोग शिकमी के रूप में जानते हैं।
सेमरा व शेरपुर के भी बहुत सारे लोगों के खेत इस कानून के चलते उनके हाथों से निकल गये। इसी कड़ी में शेरपुर कलाँ के केदार राय का खेत सेमरा के जहली राम के नाम हो गया लेकिन फिर भी केदार राय अपना खेत छोड़ने को तैयार नहीं थे। इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए अकलू राय जहली राम को लेकर शेरपुर केदार राय के यहाँ पहुँचे लेकिन वहाँ जाने पर उन्होंने शिकमी का खेत छोड़ने से साफ मना कर दिया और जहली राम के साथ बदतमीज़ी भी कर दी। स्वाभिमानी स्वभाव के इंसान अकलू राय से अन्याय बर्दाश्त नहीं होता था अपने सामने ही केदार राय का यह व्यवहार देखकर उनको बहुत बुरा लगा और तुरंत जहली राम को वहाँ से लेकर वो घर चले आये। उन्होंने जहली राम को हरसंभव मदद का भरोसा दिया उस समय अकलू राय बहुत बड़ा नाम था उनका वरदहस्त पाकर जहली राम ने न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में अकलू राय ने जहली राम का खुलकर समर्थन किया था और भरोसा दिलाया था कि किसी भी कीमत पर वह उनको उनका हक़ दिलाकर रहेंगे। इस बात से नाराज होकर केदार राय लगभग दो सौ लोगों का जत्था लेकर अकलू राय के खेतों पर कब्जा करने के लिए निकले। इसमें मजेदार बात यह थी कि केदार राय ने किसी को भी बताया नहीं था कि वो अकलू राय के खेतों पर जा रहे हैं उन्होंने सबसे ये बताया था कि वो उन खेतों पर कब्जा करने के लिए जा रहे हैं जो खेत शिकमी में जहली राम के पास चले गये हैं क्योंकि सच्चाई बताने पर अकलू राय के खिलाफ जाने के लिए कोई तैयार नहीं होता। इधर सूचना मिलते ही अकलू राय भी अपने लाव-लश्कर के साथ अपने खेतों पर पहुँच गये लेकिन केदार राय ने भीड़ को जब मौजा पैंसठ में अकलू राय के खेतों की तरफ मुड़ने के लिए कहा तो पोल खुल गयी और भीड़ में कानाफूसी शुरू हो गयी। अकलू राय से लड़ने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ, कुछ लोग वापस चले गये, कुछ लोग आगे चले गये लेकिन उनके खेतों की तरफ कोई नहीं गया और अंत में बचे-खुचे लोग भी वापस शेरपुर लौट गये।
इसके बाद अकलू राय ने हर तरह से जहली राम की मदद की। अंततः अदालत में उन्होंने लड़ाई जीत ली और खेत जहली राम के नाम हो गया फिर कानूनी प्रक्रिया से उन्होंने खेतों पर कब्जा किया। अकलू राय के बारे में ऐसी ही अनेकों कहानियाँ आज भी लोग सुनाते हैं और उनका गुणगान करते हैं। समाज के हीन लोगों की मदद के लिए वो हमेशा तत्पर रहे और समय-समय पर उन्होंने अपने त्याग का परिचय दिया। आज जब समाज जातियों के आधार पर विभिन्न भागों में बँटा हुआ है तो ऐसी स्थिती में अकलू राय जैसे लोगों से हमें प्रेरणा लेने की जरूरत है। गाँव की युवा पीढ़ी को ऐसे लोगों के बारे में जानने व उन्हें अपना आदर्श बनाने की जरूरत है।
वाह।। मन प्रफुल्लित हो गया ऐसे पढ़ कर।। नमन है हमारे गांव के ऐसे वीर लोगो को
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