सेमरा गाँव की डॉ प्रियंका कुमारी राय बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

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सेमरा निवासी डॉ प्रियंका कुमारी राय का चयन हिंदी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है. ऐसी सफलता हासिल करके उन्होंने सभी ग्रामवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है. डॉ प्रियंका का चयन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के बीआरबी कॉलेज में हुआ है. उनका शोध-कार्य काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 'ग्रामीण जीवन का बदलता स्वरूप और शिवमूर्ति का कथा साहित्य' नामक विषय पर हुआ है. बड़ी बात यह है कि उनके पति डॉ अजीत कुमार राय भी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जो वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के सरदार वल्लभभाई पटेल कॉलेज में नियुक्त हैं. गौरतलब है कि डॉ अजीत को गिरमिटिया मजदूरों और भारतीय प्रवासन से संबंधित कार्यों के लिए भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और मॉरीशस के राष्ट्रपति द्वारा पोर्ट लुईस में सम्मानित भी किया जा चुका है. डॉ प्रियंका कुमारी राय डॉ अजीत कुमार राय गाँव के इतिहास में यह अभूतपूर्व है कि एक ही परिवार के और वो भी पति-पत्नी दोनों ही प्रोफेसर के पद पर हैं. डॉ प्रियंका गाँव के श्री वंश नारायण राय और श्रीमती प्रेमशीला राय की पुत्रवधू हैं. अपने पुत्र-पुत्रवधू को आ...

गाँव की बेटी ने किया गाँव का नाम रोशन

सेमरा(शिव राय का पुरा) की रहने वाली अपर्णा राय ने अपने पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा(NET) उत्तीर्ण करके गाँव का नाम रोशन किया है। नवंबर, 2017 में हुई नेट की परीक्षा को उन्होंने 64.57 प्रतिशत अंको के साथ हिंदी विषय से उत्तीर्ण किया है। वो जेआरएफ की मेरिट से बस थोड़ी ही पीछे हैं ज्ञात हो कि उनका यह पहला प्रयास था साथ ही बिना किसी कोचिंग क्लास से तैयारी किये सिर्फ अपने बलबूते उन्होंने ये कामयाबी हासिल की है जो कि बहुत बड़ी बात है।


उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव से ही हुई है उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई राजकीय महाविद्यालय, मुहम्मदाबाद से ही की है। बिना किसी कोचिंग के घर पर ही तैयारी करके नेट की परीक्षा उत्तीर्ण करना एक बड़ी उपलब्धि है। अपर्णा जनार्दन राय की तीसरी पुत्री हैं वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने गुरूजनों और अपने माता-पिता को देती हैं।

अपर्णा के शब्दों में, "शुरू शुरू में मुझे डर लगता था कि मैं ये कर पाऊँगी या नहीं। लोग कहते थे कि बिना किसी कोचिंग के ये करना असंभव है लेकिन मुझे दिखाना था कि मैं घर पर ही रहकर इसे कर सकती हूँ और मैंने अपने गुरूजनों की प्रेरणा और घरवालों के सहयोग से ये कर लिया।"

वो गाँव की प्रथम महिला हैं जिन्होंने नेट उत्तीर्ण किया है। उन्होंने दिखा दिया है कि गाँव की महिलाएँ, पुरूषों से पीछे नहीं हैं। अपर्णा की सफलता से गाँव की नारीशक्ति को प्रेरणा लेनी चाहिए।

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